एल नीनो मानसून सूखा: 40% कम बारिश से 6% तक खाद्य महंगाई बढ़ेगी

किसान को सरकारी योजना की जानकारी

एल नीनो मानसून सूखा भारत के लिए गंभीर संकट है। एल नीनो एक मौसम की घटना है जहां प्रशांत महासागर गर्म हो जाता है। 2026 में यह इतना मजबूत है कि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिसंबर तक इसके मजबूत रहने की संभावना 99.4% है। इसी वजह से भारत का दक्षिण-पश्चिमी मानसून कमजोर पड़ गया है, जिससे कृषि और खाद्य सुरक्षा पर गहरा संकट आ गया है।

एल नीनो मानसून सूखा और भारतीय बारिश

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने 2026 को एक दशक में सबसे कमजोर मानसून बताया है। एल नीनो मानसून सूखा के कारण जुलाई के मध्य तक देश भर में बारिश सामान्य से 40% कम हो गई है – यह कमी इतनी ज्यादा है कि खेती की बुआई का शेड्यूल बिगड़ गया है और फसल की उपज कम होने का खतरा है। खुद जून महीने में बारिश सामान्य से 41.5% कम रही – यह दस सालों का सबसे बुरा जून था।

खरीफ का मतलब है उन फसलें जो जून से सितंबर के बीच बोई जाती हैं और पूरी तरह बारिश पर निर्भर करती हैं। धान, मक्का, कपास और दालें खरीफ की मुख्य फसलें हैं। जब बारिश कम हो तो ये एल नीनो मानसून सूखा फसलें सूख जाती हैं, पैदावार गिरती है और किसानों की आय घटती है। फिलहाल खरीफ की बुआई पिछले साल से 16% कम हुई है क्योंकि किसान भूमि में नमी आने का इंतज़ार कर रहे हैं।

एल नीनो मानसून सूखा से खाद्य महंगाई का संकट

बारिश की कमी अब खाद्य पदार्थों की कीमतों को बढ़ा रही है। एल नीनो मानसून सूखा का असर बाजार में दिखने लगा है। सब्जियों की कीमत 1.5% बढ़ी है, अनाज की 0.5% और तेल की 9.5%। सरकार के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर यह बारिश की कमी बनी रहे तो 2027 के वित्तीय वर्ष में खाद्य महंगाई 6% तक जा सकती है। मात्र 10% बारिश की कमी से कुल महंगाई में एक फीसदी तक का इजाफा हो सकता है, जिससे सामान्य लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

जल संकट: पानी की किल्लत और सिंचाई की समस्या

कई इलाकों में पानी की किल्लत गंभीर है। बाँधों में पानी का स्तर सामान्य से कम हो गया है, जिससे जमीन का पानी रिचार्ज नहीं हो रहा है और सिंचाई की समस्या बढ़ गई है। यानी दोहरी समस्या है – एक तो बारिश कम आ रही है, दूसरा संचित पानी भी कम है।

सरकार की योजना: एल नीनो मानसून सूखा से निपटना

इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने एक व्यापक योजना बनाई है। कृषि मंत्रालय ने 315 कमजोर जिलों को चिन्हित किया है और आपातकालीन उपाय तैयार किए हैं। इसमें सूखा-सहन करने वाली फसलें, जैसे सूखा-प्रतिरोधी मक्का, बाजरा और बेहतर दाल को बढ़ावा देना शामिल है। पीएम किसान योजना जैसी सरकारी पहल इस दौर में किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।

गर्मी की समस्या इसे और बदतर बना रही है। एल नीनो तापमान भी बढ़ाता है – यानी कम पानी के साथ ज्यादा गर्मी का संयोजन। ऐसे में सूखा-सहन करने वाली फसलें भी परेशानी में आ जाती हैं। मौसम विज्ञानी बताते हैं कि ये सब आपस में जुड़ा हुआ है। एल नीनो जब प्रशांत महासागर को गर्म करता है तो भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाओं को रोक देता है। यह मैकेनिज्म पूरी तरह साबित है – इसीलिए जब दुनिया भर में एल नीनो मजबूत होता है तो दक्षिण एशिया में एल नीनो मानसून सूखा की समस्या हो जाती है।

Leave a Reply