राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर्वोच्च नेता मोहन भागवत ने युवाओं, खासकर जेनरेशन जेड को संदेश दिया है कि परिवार से जुड़ना ही इस पीढ़ी का सबसे बड़ा काम है। उन्होंने कहा है कि आजकल युवा अपने माता-पिता और बड़ों से दूर हो रहे हैं, जिससे पारिवारिक रिश्ते कमज़ोर हो रहे हैं। भागवत ने इसे एक चिंताजनक प्रवृत्ति बताया है।
‘विश्व मंगलव्य सभा‘ में RSS के प्रमुख ने कहा कि परिवार में समय बिताना और बड़ों से बातचीत करना आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के साथ खाना खाना, उनके साथ बैठकर बातें करना, उनकी सलाह सुनना – ये सब कुछ हम भूल गए हैं। लेकिन ये ही वह चीज़ें हैं जो एक संपूर्ण समाज का आधार बनती हैं।
भागवत का तर्क है कि जेनरेशन जेड को एक अलग दुनिया में जन्म मिला – सोशल मीडिया, स्मार्टफोन, और इंटरनेट की दुनिया में। इसकी वजह से वे अपने परिवार से दूर हो गए हैं। वे सोशल मीडिया पर दोस्तों को ज्यादा समय देते हैं, लेकिन घर के लोगों से कम बातचीत करते हैं। यह एक पीढ़ी के अलगाववाद का संकेत है।
भागवत के अनुसार, परिवार में ईमानदार संवाद ही समाधान है। अगर माता-पिता और बच्चों के बीच खुली बातचीत हो, तो ज्यादातर समस्याओं का समाधान हो सकता है। वे कहते हैं कि युवाओं को अपनी समस्याएं परिवार के साथ साझा करनी चाहिए, और माता-पिता को युवाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
RSS प्रमुख का मानना है कि यह केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक समस्या है। जब परिवार कमज़ोर हो जाता है, तो पूरा समाज कमज़ोर हो जाता है। भारतीय संस्कृति में परिवार को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। भागवत कहते हैं कि इस परंपरा को बचाना आज के समय की ज़रूरत है।
भागवत ने शिक्षा संस्थाओं से भी कहा है कि वे सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा दें। स्कूल और कॉलेजों को परिवार के महत्व को समझाने में मदद करनी चाहिए। जब युवा समझते हैं कि परिवार कितना महत्वपूर्ण है, तो वे अपने माता-पिता के करीब आना शुरू करते हैं।
भागवत के संदेश का सार यह है कि हर परिवार को एक दिन निर्धारित करना चाहिए जब सभी एक साथ बैठ सकें। दोपहर का खाना हो या रात का भोजन, इस बात का ध्यान नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि परिवार एक साथ हो और खुली बातचीत हो। स्मार्टफोन को किनारे रख कर, सिर्फ आपस में बातचीत करें।
मोहन भागवत का संदेश हालांकि RSS के दृष्टिकोण से दिया गया है, लेकिन इसमें एक सार्वभौमिक सत्य है – परिवार ही समाज की बुनियाद है। अगर हम अपने परिवारों को मजबूत रखें, तो समाज अपने आप मजबूत हो जाएगा। भागवत आशावादी हैं कि यदि जेनरेशन जेड इस संदेश को समझे, तो एक नई पीढ़ी का निर्माण हो सकता है जो परिवार के मूल्यों को समझती हो।

